1. ‘पेड़ से पत्ता गिरा।’ – इस वाक्य में ‘से’ किस कारक का चिह्न है?
विस्तार: जब ‘से’ का प्रयोग अलगाव (separation) के अर्थ में होता है, तो वहाँ अपादान कारक होता है। यहाँ पत्ता पेड़ से अलग हो रहा है।
2. ‘हे प्रभु! मेरी रक्षा करो।’ – इस वाक्य में कौन-सा कारक है?
विस्तार: जब किसी को पुकारने या संबोधित करने का भाव हो, तो वहाँ संबोधन कारक होता है। इसके चिह्न हैं- ‘हे!’, ‘अरे!’, ‘ओ!’।
3. ‘राम ने रावण को बाण से मारा।’ – इस वाक्य में ‘करण कारक’ का चिह्न कौन सा है?
विस्तार: करण कारक का चिह्न ‘से’ या ‘के द्वारा’ होता है और यह क्रिया के साधन (instrument) का बोध कराता है। यहाँ मारने का साधन ‘बाण’ है।
4. ‘राजा ने गरीबों को कंबल दिए।’ – इस वाक्य में ‘गरीबों को’ में कौन-सा कारक है?
विस्तार: जब किसी को कुछ दिया जाए या किसी के लिए कुछ किया जाए, तो वहाँ ‘को’ विभक्ति होने पर भी संप्रदान कारक होता है, कर्म कारक नहीं। देने के भाव में संप्रदान कारक होता है।
5. ‘वह छत पर बैठा है।’ – रेखांकित पद में कौन-सा कारक है?
विस्तार: अधिकरण कारक क्रिया के आधार (स्थान या समय) का बोध कराता है। इसके चिह्न ‘में’ और ‘पर’ हैं। यहाँ ‘छत पर’ बैठने के स्थान का बोध हो रहा है।
6. ‘यह राम की पुस्तक है।’ – इस वाक्य में कौन-सा कारक है?
विस्तार: संबंध कारक (का, की, के, रा, री, रे) एक संज्ञा या सर्वनाम का दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से संबंध बताता है। यहाँ ‘राम’ का ‘पुस्तक’ से संबंध बताया गया है।
7. ‘बच्चे बस से पाठशाला जाते हैं।’ – इस वाक्य में ‘बस से’ में कौन सा कारक है?
विस्तार: यहाँ ‘बस’ पाठशाला जाने का साधन (means) है। जब ‘से’ का प्रयोग साधन के अर्थ में होता है, तो वहाँ करण कारक होता है।
8. कर्ता कारक का विभक्ति चिह्न क्या है?
विस्तार: कर्ता कारक का विभक्ति चिह्न ‘ने’ है, जो क्रिया को करने वाले का बोध कराता है। इसका प्रयोग प्रायः भूतकाल की सकर्मक क्रियाओं के साथ होता है।
9. ‘विद्यालय’ का सही संधि-विच्छेद क्या है?
विस्तार: यह दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण है। यहाँ (आ + आ = आ) नियम का पालन हुआ है।
10. ‘नमस्ते’ में कौन-सी संधि है?
विस्तार: इसका संधि-विच्छेद ‘नमः + ते’ है। विसर्ग (:) के बाद ‘त’ आने पर विसर्ग ‘स्’ में बदल जाता है।
11. ‘पवन’ का संधि-विच्छेद क्या है?
विस्तार: यह अयादि स्वर संधि का उदाहरण है। यहाँ (ओ + अ = अव्) नियम के अनुसार ‘पवन’ शब्द बनता है।
12. ‘सज्जन’ का संधि-विच्छेद क्या है?
विस्तार: यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। नियम के अनुसार, यदि ‘त्’ के बाद ‘ज’ या ‘झ’ आए तो ‘त्’ का ‘ज्’ हो जाता है।
13. ‘महर्षि’ में कौन-सी संधि है?
विस्तार: इसका संधि-विच्छेद ‘महा + ऋषि’ है। गुण संधि के नियम (आ + ऋ = अर्) के अनुसार यह ‘महर्षि’ बनता है।
14. ‘इत्यादि’ का सही संधि-विच्छेद है-
विस्तार: यह यण स्वर संधि का उदाहरण है। नियम के अनुसार, जब ‘इ’ के बाद कोई भिन्न स्वर ‘आ’ आता है, तो ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है। (इ + आ = या)।
15. ‘निः + चल’ की सही संधि क्या होगी?
विस्तार: यह विसर्ग संधि का नियम है। यदि विसर्ग (:) के बाद ‘च’ या ‘छ’ हो तो विसर्ग का ‘श्’ हो जाता है।
16. ‘सदैव’ में कौन-सी संधि है?
विस्तार: इसका संधि-विच्छेद ‘सदा + एव’ है। वृद्धि संधि के नियम (आ + ए = ऐ) के अनुसार यह ‘सदैव’ बनता है।
17. ‘यथाशक्ति’ में कौन-सा समास है?
विस्तार: जिस समास का पहला पद (पूर्वपद) अव्यय (जैसे- यथा, प्रति, आ) हो और प्रधान हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। ‘यथाशक्ति’ का विग्रह है- ‘शक्ति के अनुसार’।
18. ‘नीलकमल’ में कौन-सा समास है?
विस्तार: जहाँ एक पद विशेषण (नील) और दूसरा पद विशेष्य (कमल) हो, वहाँ कर्मधारय समास होता है। इसका विग्रह है- ‘नीला है जो कमल’।
19. ‘दशानन’ में कौन-सा समास है?
विस्तार: जब दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं, तो वहाँ बहुव्रीहि समास होता है। ‘दशानन’ का अर्थ है ‘दस हैं आनन (मुख) जिसके’, अर्थात् रावण।
20. ‘माता-पिता’ में कौन-सा समास है?
विस्तार: जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ लगता हो, वह द्वंद्व समास कहलाता है। इसका विग्रह है- ‘माता और पिता’।
21. ‘राजपुत्र’ का समास विग्रह क्या है?
विस्तार: यह संबंध तत्पुरुष समास का उदाहरण है। इसमें संबंध कारक की विभक्ति ‘का’ का लोप हुआ है।
22. जिस समास का पहला पद संख्यावाचक होता है, वह कहलाता है-
विस्तार: द्विगु समास में पूर्वपद संख्यावाची होता है और समस्त पद समूह का बोध कराता है। जैसे- चौराहा (चार राहों का समूह), त्रिलोक (तीन लोकों का समाहार)।
23. ‘पर्णकुटी’ शब्द में समास है-
विस्तार: ‘पर्णकुटी’ का विग्रह है ‘पर्ण (पत्ते) से बनी कुटी’। यहाँ ‘से’ (करण) विभक्ति का लोप है, अतः यह करण तत्पुरुष समास है।
24. ‘आजन्म’ शब्द किसका उदाहरण है?
विस्तार: ‘आजन्म’ में ‘आ’ उपसर्ग (अव्यय) लगा है। इसका विग्रह है ‘जन्म से लेकर’। यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है।
25. ‘मोहन से चला नहीं जाता।’ – इस वाक्य में कौन-सा वाच्य है?
विस्तार: भाववाच्य में क्रिया का संबंध कर्ता या कर्म से न होकर भाव से होता है। इसमें क्रिया सदैव अकर्मक, पुल्लिंग और एकवचन में रहती है तथा कर्ता के साथ ‘से’ या ‘के द्वारा’ जुड़ा होता है। यहाँ असमर्थता का भाव प्रकट हो रहा है।
26. ‘राम पुस्तक पढ़ता है।’ – यह वाक्य किस वाच्य का उदाहरण है?
विस्तार: कर्तृवाच्य में क्रिया का लिंग और वचन कर्ता के अनुसार होता है। यहाँ ‘पढ़ता है’ क्रिया ‘राम’ (पुल्लिंग, एकवचन) के अनुसार है।
27. ‘छात्रों द्वारा पत्र लिखा गया।’ – इस वाक्य का कर्तृवाच्य में रूप होगा-
विस्तार: दिए गए वाक्य ‘छात्रों द्वारा पत्र लिखा गया’ कर्मवाच्य (भूतकाल) में है। इसका कर्तृवाच्य रूप बनाने के लिए कर्ता ‘छात्रों’ को प्रधान बनाना होगा और क्रिया को कर्ता के अनुसार बदलना होगा।
28. कर्मवाच्य में किसकी प्रधानता होती है?
विस्तार: कर्मवाच्य में क्रिया का लिंग और वचन कर्म के अनुसार होता है, और इसमें कर्म की प्रधानता होती है। जैसे- ‘सीता द्वारा गीत गाया गया’ (गीत-पुल्लिंग, गया-पुल्लिंग)।
29. ‘चलो, अब सोया जाए।’ – यह वाक्य किस वाच्य में है?
विस्तार: इस वाक्य में क्रिया (सोया जाए) ही मुख्य है और भाव की प्रधानता है। कर्ता यहाँ गौण है। यह भाववाच्य का एक विशिष्ट उदाहरण है।
30. इनमें से कौन-सा वाक्य कर्तृवाच्य का नहीं है?
विस्तार: वाक्य (क), (ख) और (घ) में क्रिया कर्ता के अनुसार है, अतः वे कर्तृवाच्य हैं। वाक्य (ग) में असमर्थता का भाव है और क्रिया कर्ता या कर्म पर आश्रित नहीं है, अतः यह भाववाच्य है।
31. ‘वह’ सर्वनाम है-
विस्तार: पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद हैं – उत्तम पुरुष (मैं, हम), मध्यम पुरुष (तू, तुम, आप), और अन्य पुरुष (वह, वे, यह, ये)। ‘वह’ का प्रयोग किसी तीसरे व्यक्ति के लिए होता है।
32. ‘जो सोयेगा, सो खोयेगा।’ – इसमें ‘जो’ और ‘सो’ कौन-से सर्वनाम हैं?
विस्तार: जो सर्वनाम वाक्य में आए किसी दूसरे सर्वनाम से संबंध बताते हैं, वे संबंधवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- जो-सो, जैसा-वैसा।
33. ‘आप भला तो जग भला।’ – वाक्य में ‘आप’ शब्द कौन-सा सर्वनाम है?
विस्तार: जब ‘आप’ शब्द का प्रयोग कर्ता स्वयं के लिए करता है (अर्थात् ‘स्वयं’ या ‘खुद’ के अर्थ में), तो वह निजवाचक सर्वनाम होता है। यहाँ ‘आप’ का अर्थ ‘स्वयं’ से है।
34. ‘बाहर कोई खड़ा है।’ – इस वाक्य में ‘कोई’ कौन-सा सर्वनाम है?
विस्तार: जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध न हो, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। ‘कोई’ और ‘कुछ’ अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं।
35. ‘यह मेरी पुस्तक है।’ – में ‘यह’ कौन-सा सर्वनाम है?
विस्तार: जो सर्वनाम किसी निकट या दूर की वस्तु या व्यक्ति की ओर निश्चित संकेत करते हैं, वे निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। ‘यह’ और ‘वह’ निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।
36. संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द क्या कहलाते हैं?
विस्तार: व्याकरण में, संज्ञा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।
37. ‘तुम क्या कर रहे हो?’ – इस वाक्य में ‘क्या’ कौन-सा सर्वनाम है?
विस्तार: जिन सर्वनामों का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए किया जाता है, उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – कौन, क्या, कहाँ, कैसे आदि।
38. सर्वनाम के कुल कितने भेद होते हैं?
विस्तार: सर्वनाम के छः भेद होते हैं: 1. पुरुषवाचक, 2. निश्चयवाचक, 3. अनिश्चयवाचक, 4. संबंधवाचक, 5. प्रश्नवाचक, और 6. निजवाचक।
39. ‘काला घोड़ा दौड़ रहा है।’ – वाक्य में ‘काला’ शब्द है-
विस्तार: जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, रूप, आकार आदि का बोध कराते हैं, वे गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं। यहाँ ‘काला’ शब्द घोड़े का रंग बता रहा है।
40. ‘कक्षा में चार छात्र बैठे हैं।’ – वाक्य में कौन-सा विशेषण है?
विस्तार: जो विशेषण किसी संज्ञा की निश्चित या अनिश्चित संख्या का बोध कराते हैं, वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं। यहाँ ‘चार’ एक निश्चित संख्या है, अतः यह निश्चित संख्यावाचक विशेषण है।
41. ‘मुझे थोड़ा पानी चाहिए।’ – वाक्य में ‘थोड़ा’ किस प्रकार का विशेषण है?
विस्तार: परिमाणवाचक विशेषण उन वस्तुओं की मात्रा या माप-तौल बताते हैं जिन्हें गिना नहीं जा सकता। ‘थोड़ा’, ‘बहुत’, ‘कम’ आदि अनिश्चित परिमाण का बोध कराते हैं।
42. ‘यह घर मेरा है।’ – वाक्य में ‘यह’ शब्द है-
विस्तार: जब कोई सर्वनाम शब्द संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताता है, तो वह सार्वनामिक (या संकेतवाचक) विशेषण कहलाता है। यहाँ ‘यह’ शब्द ‘घर’ (संज्ञा) की ओर संकेत कर रहा है।
43. ‘प्र’ विशेषणों के भी विशेषण होते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
विस्तार: जो शब्द विशेषण की भी विशेषता बताते हैं, उन्हें प्रविशेषण कहते हैं। जैसे- ‘यह बहुत सुंदर फूल है।’ में ‘सुंदर’ विशेषण है और ‘बहुत’ प्रविशेषण है।
44. ‘दो किलो सेब’ में कौन-सा विशेषण है?
विस्तार: यहाँ ‘दो किलो’ सेब की एक निश्चित मात्रा (माप-तौल) को बता रहा है। जिन वस्तुओं को मापा या तौला जाता है, उनके साथ परिमाणवाचक विशेषण का प्रयोग होता है।
45. ‘आलसी’ शब्द का विशेष्य क्या होगा?
विस्तार: विशेष्य वह संज्ञा या सर्वनाम शब्द है जिसकी विशेषता बताई जाती है। ‘आलसी’ एक विशेषण है जो ‘आलस्य’ (भाववाचक संज्ञा) की विशेषता बताता है। जैसे- ‘आलस्य एक बुरा गुण है’।
46. ‘सालाना’ शब्द किस प्रकार का विशेषण है?
विस्तार: गुणवाचक विशेषण के अंतर्गत काल-संबंधी विशेषण भी आते हैं। ‘सालाना’, ‘मासिक’, ‘दैनिक’ आदि शब्द कालवाचक गुणवाचक विशेषण हैं।
47. ‘अत्यंत’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है-
विस्तार: ‘अत्यंत’ का संधि-विच्छेद ‘अति + अंत’ (यण संधि) है। इसमें ‘अति’ उपसर्ग है जिसका अर्थ है ‘बहुत अधिक’।
48. ‘पराजय’ शब्द में कौन-सा उपसर्ग है?
विस्तार: ‘पराजय’ शब्द ‘परा’ उपसर्ग और ‘जय’ मूल शब्द से मिलकर बना है। ‘परा’ का अर्थ होता है ‘उलटा’ या ‘पीछे’।
49. ‘अनु’ उपसर्ग का अर्थ है-
विस्तार: ‘अनु’ एक संस्कृत उपसर्ग है जिसका अर्थ ‘क्रम’, ‘पीछे’, या ‘समानता’ होता है। जैसे – अनुकरण (पीछे चलना), अनुसार (के समान)।
50. ‘निर्वाह’ में कौन-सा उपसर्ग है?
विस्तार: ‘निर्वाह’ शब्द ‘निर्’ उपसर्ग और ‘वाह’ मूल शब्द से बना है। ‘निर्’ का अर्थ होता है ‘बिना’ या ‘बाहर’।
51. ‘बेइंसाफी’ में प्रयुक्त उपसर्ग है-
विस्तार: ‘बेइंसाफी’ में ‘बे’ एक विदेशी (फारसी) उपसर्ग है, जिसका अर्थ ‘बिना’ होता है। मूल शब्द ‘इंसाफ’ है।
52. ‘लिखावट’ में कौन-सा प्रत्यय है?
विस्तार: ‘लिखावट’ शब्द ‘लिख’ धातु में ‘आवट’ प्रत्यय जोड़ने से बना है। ‘आवट’ एक कृत् प्रत्यय है जो भाववाचक संज्ञा बनाता है।
53. ‘सामाजिक’ शब्द में मूल शब्द और प्रत्यय है-
विस्तार: ‘समाज’ मूल शब्द में ‘इक’ प्रत्यय जोड़ने पर ‘सामाजिक’ शब्द बनता है। ‘इक’ प्रत्यय लगने पर शब्द के प्रथम स्वर में वृद्धि हो जाती है (अ का आ)।
54. ‘धुंधला’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है-
विस्तार: ‘धुंध’ मूल शब्द में ‘ला’ प्रत्यय जोड़ने से विशेषण शब्द ‘धुंधला’ बनता है।
55. जो प्रत्यय धातु (क्रिया) के अंत में लगते हैं, वे कहलाते हैं-
विस्तार: क्रिया या धातु के अंत में जुड़कर नए शब्द बनाने वाले प्रत्यय कृत् प्रत्यय कहलाते हैं और उनसे बने शब्द कृदंत कहलाते हैं। जैसे- लिख + आई = लिखाई।
56. ‘रसोईया’ में प्रत्यय है-
विस्तार: ‘रसोई’ शब्द में ‘इया’ प्रत्यय जुड़ने से ‘रसोईया’ (रसोई बनाने वाला) शब्द बना है। यह एक तद्धित प्रत्यय है।
57. ‘बच्चा रो रहा है।’ – इस वाक्य में क्रिया है-
विस्तार: जिस क्रिया का फल सीधा कर्ता पर पड़ता है और उसे कर्म की आवश्यकता नहीं होती, वह अकर्मक क्रिया कहलाती है। रोने का प्रभाव बच्चे पर ही पड़ रहा है। ‘क्या’ या ‘किसको’ से प्रश्न करने पर उत्तर नहीं मिलता।
58. ‘माँ ने बच्चे को दूध पिलाया।’ – इस वाक्य में कौन-सी क्रिया है?
विस्तार: जिस क्रिया के दो कर्म होते हैं, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं। यहाँ ‘पिलाया’ क्रिया के दो कर्म हैं- ‘बच्चे को’ (गौण कर्म) और ‘दूध’ (मुख्य कर्म)।
59. ‘राम ने खाना खाकर सो गया।’ – वाक्य में ‘खाकर’ कौन-सी क्रिया है?
विस्तार: जब कर्ता एक क्रिया समाप्त करके तुरंत दूसरी क्रिया आरंभ करता है, तो पहली क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है। इसमें धातु के साथ ‘कर’ या ‘करके’ लगता है।
60. ‘मालिक ने नौकर से काम करवाया।’ – यह किस क्रिया का उदाहरण है?
विस्तार: जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, तो उस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे- करवाना, पढ़वाना, लिखवाना।
61. ‘बात’ से बनने वाली नामधातु क्रिया है-
विस्तार: संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण शब्दों से बनने वाली क्रियाओं को नामधातु क्रिया कहते हैं। ‘बात’ (संज्ञा) से ‘बतियाना’ क्रिया बनती है।
62. ‘वह खाना खा रहा है।’ – इस वाक्य में क्रिया किस काल की है?
विस्तार: जब क्रिया के वर्तमान समय में जारी रहने का पता चले, तो उसे अपूर्ण (या तात्कालिक) वर्तमान काल कहते हैं। इसकी पहचान ‘रहा है’, ‘रही है’, ‘रहे हैं’ से होती है।
63. ‘शायद आज वर्षा होगी।’ – यह वाक्य किस काल का है?
विस्तार: जब भविष्य में किसी कार्य के होने की संभावना या आशंका व्यक्त की जाती है, तो उसे संभाव्य भविष्यत् काल कहते हैं। ‘शायद’, ‘संभवतः’ जैसे शब्द इसका संकेत देते हैं।
64. ‘राम ने रावण को मारा था।’ – वाक्य में कौन-सा भूतकाल है?
विस्तार: जब क्रिया के बहुत पहले ही समाप्त हो जाने का बोध हो, तो उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान ‘चुका था’, ‘चुकी थी’ या क्रिया के साथ ‘था’, ‘थी’, ‘थे’ लगने से होती है।
65. ‘यदि तुम पढ़ते, तो अवश्य पास होते।’ – यह वाक्य किस काल का उदाहरण है?
विस्तार: जब भूतकाल में एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर करता है, परंतु किसी कारणवश क्रिया हो नहीं पाती, तो उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते हैं। इसमें शर्त का भाव होता है।
66. ‘मोहन गया।’ – यह वाक्य किस काल में है?
विस्तार: जब क्रिया के भूतकाल में सामान्य रूप से होने का पता चले, लेकिन समय का निश्चित ज्ञान न हो, तो उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं।
67. ‘अंधे की लाठी’ मुहावरे का अर्थ है-
विस्तार: इस मुहावरे का प्रयोग उस व्यक्ति या वस्तु के लिए किया जाता है जो किसी असहाय व्यक्ति का एकमात्र सहारा हो। जैसे- श्रवण कुमार अपने माता-पिता के लिए अंधे की लाठी थे।
68. ‘आग में घी डालना’ का क्या अर्थ है?
विस्तार: इसका अर्थ है किसी के क्रोध या झगड़े को और भड़काना, जिससे स्थिति और बिगड़ जाए।
69. ‘कान भरना’ मुहावरे का अर्थ है-
विस्तार: ‘कान भरना’ का अर्थ है किसी के विरुद्ध किसी दूसरे व्यक्ति से शिकायत या निंदा करना ताकि उसके मन में उसके प्रति दुर्भावना पैदा हो जाए।
70. ‘ईद का चाँद होना’ का अर्थ है-
विस्तार: जिस प्रकार ईद का चाँद बहुत प्रतीक्षा के बाद दिखाई देता है, उसी प्रकार जब कोई व्यक्ति बहुत समय बाद मिलता है तो उसके लिए यह मुहावरा प्रयोग किया जाता है।
71. ‘नौ दो ग्यारह होना’ का अर्थ है-
विस्तार: इसका अर्थ है किसी स्थान से तुरंत चंपत हो जाना या भाग जाना। जैसे – पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
72. ‘Honesty is the best policy.’ का सही हिन्दी अनुवाद है-
विस्तार: यहाँ ‘best’ (सुपरलेटिव डिग्री) का प्रयोग हुआ है, जिसका सही अनुवाद ‘सबसे अच्छी’ होगा। अतः विकल्प (ख) सबसे सटीक अनुवाद है।
73. ‘The train had already left.’ का सही हिन्दी अनुवाद है-
विस्तार: ‘had left’ Past Perfect Tense का सूचक है, जिसका हिन्दी में अनुवाद ‘चुका था’, ‘चुकी थी’, ‘चुके थे’ के साथ होता है। यह पूर्ण भूतकाल को दर्शाता है।
74. ‘It may rain today.’ का उचित अनुवाद है-
विस्तार: ‘may’ का प्रयोग संभावना (possibility) व्यक्त करने के लिए होता है। इसका हिन्दी में सबसे उपयुक्त अनुवाद ‘सकती है’ या ‘सकता है’ होता है।
75. ‘Let me go.’ का हिन्दी अनुवाद क्या होगा?
विस्तार: ‘Let’ का प्रयोग अनुमति माँगने या देने के संदर्भ में होता है। ‘Let me go’ का शाब्दिक और भावार्थ दोनों ही ‘मुझे जाने दो’ है।
76. ‘He is known to me.’ का सही अनुवाद है-
विस्तार: यह Passive Voice में है। इसका Active Voice होगा ‘I know him’। अतः इसका सही अनुवाद ‘मैं उसे जानता हूँ’ है। भावानुवाद के रूप में ‘वह मेरा परिचित है’ भी सही है। लेकिन व्याकरणिक दृष्टि से (क) अधिक सटीक है।
77. ‘दुस्साहस’ शब्द में उपसर्ग है-
विस्तार: ‘दुस्साहस’ शब्द ‘दुस्’ उपसर्ग और ‘साहस’ मूल शब्द से बना है। व्यंजन संधि के नियम से ‘स्’ के बाद ‘स’ आने पर परिवर्तन नहीं होता।
78. ‘सेनापति’ में कौन-सा समास है?
विस्तार: इसका विग्रह है ‘सेना का पति (स्वामी)’। यहाँ ‘का’ संबंध कारक की विभक्ति का लोप है, अतः यह संबंध तत्पुरुष समास है।
79. ‘मुझसे उठा नहीं गया।’ – वाक्य में वाच्य है-
विस्तार: यहाँ कर्ता के साथ ‘से’ विभक्ति है और असमर्थता का भाव प्रकट हो रहा है। क्रिया का केंद्र भाव है, अतः यह भाववाच्य है।
80. ‘मनोरथ’ का संधि-विच्छेद है-
विस्तार: यह विसर्ग संधि का उदाहरण है। नियम के अनुसार, यदि विसर्ग (:) से पहले ‘अ’ हो और बाद में किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण या य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग का ‘ओ’ हो जाता है।
81. ‘चतुर’ विद्यार्थी से प्रश्न पूछो। वाक्य में ‘चतुर’ शब्द है-
विस्तार: यहाँ ‘चतुर’ शब्द ‘विद्यार्थी’ (संज्ञा) की विशेषता बता रहा है, अतः यह एक गुणवाचक विशेषण है।
82. ‘चोर ने धन के लिए धारदार हथियार से व्यवसायी की गर्दन धड़ से अलग कर दी।’ इस वाक्य में किस कारक का प्रयोग नहीं हुआ है?
विस्तार: वाक्य में: ‘चोर ने’ (कर्ता), ‘धन के लिए’ (संप्रदान), ‘हथियार से’ (करण), ‘व्यवसायी की’ (संबंध), ‘गर्दन’ (कर्म), ‘धड़ से अलग’ (अपादान)। अधिकरण कारक (में, पर) का प्रयोग नहीं हुआ है।
83. ‘खिचड़ी’ किस प्रकार का शब्द है?
विस्तार: जिन शब्दों की उत्पत्ति का कोई स्रोत ज्ञात नहीं होता और वे स्थानीय बोलियों से भाषा में आ जाते हैं, उन्हें देशज शब्द कहते हैं। खिचड़ी, पगड़ी, लोटा, पेट आदि देशज शब्द हैं।
84. ‘बुढ़ापा’ एक प्रकार का अभिशाप है। रेखांकित शब्द की संज्ञा है-
विस्तार: जो शब्द किसी गुण, दोष, भाव, अवस्था या दशा का बोध कराते हैं, वे भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं। ‘बुढ़ापा’ एक अवस्था का नाम है।
85. ‘दाल में कुछ काला होना’ का अर्थ है-
विस्तार: इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी मामले में कुछ गड़बड़ या छिपा हुआ रहस्य होने का शक होता है।
86. ‘वह कल आएगा।’ – में ‘वह’ कौन सा सर्वनाम है?
विस्तार: जब ‘वह’ का प्रयोग किसी व्यक्ति के नाम के स्थान पर किया जाता है, तो यह अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम होता है।
87. ‘शिक्षक ने छात्रों को पढ़ाया।’ – इसका कर्मवाच्य रूप होगा:
विस्तार: कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलने के लिए कर्ता के साथ ‘से’ या ‘के द्वारा’ जोड़ा जाता है और क्रिया को कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदल दिया जाता है।
88. ‘सुपुत्र’ में कौन-सा समास है, यदि इसका विग्रह ‘सुंदर है जो पुत्र’ किया जाए?
विस्तार: जब एक पद विशेषण (‘सु’ अर्थात सुंदर) और दूसरा पद विशेष्य (‘पुत्र’) हो, तो वहाँ कर्मधारय समास होता है।
89. ‘मैं अभी आया हूँ।’ – इस वाक्य में कौन-सा काल है?
विस्तार: आसन्न भूतकाल से यह पता चलता है कि क्रिया अभी-अभी या निकट भूतकाल में समाप्त हुई है। इसकी पहचान क्रिया के साथ ‘है’, ‘हूँ’ लगने से होती है।
90. ‘Welcome’ शब्द के लिए उचित हिन्दी पारिभाषिक शब्द है-
विस्तार: ‘Welcome’ का सबसे सटीक और प्रचलित पारिभाषिक शब्द ‘स्वागत’ है।
91. ‘परोपकार’ में कौन-सी संधि है?
विस्तार: इसका संधि-विच्छेद ‘पर + उपकार’ है। गुण संधि के नियम (अ + उ = ओ) के अनुसार यह ‘परोपकार’ बनता है।
92. ‘घबराहट’ में कौन-सा प्रत्यय है?
विस्तार: ‘घबरा’ (क्रिया) में ‘आहट’ प्रत्यय जोड़ने से भाववाचक संज्ञा ‘घबराहट’ बनती है।
93. ‘घर का भेदी लंका ढाए’ लोकोक्ति का अर्थ है-
विस्तार: यह लोकोक्ति रामायण के प्रसंग पर आधारित है, जहाँ विभीषण (घर का भेदी) के कारण रावण का विनाश हुआ। इसका अर्थ है कि जब कोई अपना ही व्यक्ति शत्रु से मिल जाता है तो बड़ी से बड़ी हानि होती है।
94. ‘वह दौड़कर चलता है।’ वाक्य में ‘दौड़कर’ क्या है?
विस्तार: यहाँ ‘दौड़ना’ क्रिया ‘चलने’ की क्रिया से पहले हो रही है। जब कर्ता एक क्रिया समाप्त करके दूसरी क्रिया करता है, तो पहली क्रिया पूर्वकालिक होती है।
95. ‘General Manager’ का हिन्दी पारिभाषिक शब्द है-
विस्तार: प्रशासनिक और कार्यालयी भाषा में ‘General Manager’ के लिए ‘महाप्रबंधक’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
96. ‘अधोगति’ में कौन-सी संधि है?
विस्तार: इसका संधि-विच्छेद ‘अधः + गति’ है। विसर्ग के बाद घोष व्यंजन ‘ग’ आने पर विसर्ग का ‘ओ’ हो जाता है।
97. ‘त्रिफला’ में कौन-सा समास है?
विस्तार: ‘त्रिफला’ का विग्रह है ‘तीन फलों का समाहार (समूह)’। जिस समास का पहला पद संख्यावाचक हो, वह द्विगु समास कहलाता है।
98. ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ – में ‘जिसकी’, ‘उसकी’ कौन-से सर्वनाम हैं?
विस्तार: जो सर्वनाम वाक्य के दो भागों में संबंध स्थापित करते हैं, वे संबंधवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे – जो-सो, जिसकी-उसकी, जैसा-वैसा।
99. ‘अक्ल पर पत्थर पड़ना’ मुहावरे का सही अर्थ है-
विस्तार: जब कोई व्यक्ति सही-गलत का निर्णय नहीं कर पाता या मूर्खतापूर्ण कार्य करता है, तब इस मुहावरे का प्रयोग होता है, जिसका अर्थ है समझ का काम न करना।
100. ‘All that glitters is not gold.’ का सही हिन्दी अनुवाद है-
विस्तार: यह एक प्रसिद्ध कहावत है। इसका सबसे सटीक और प्रचलित भावानुवाद ‘हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती’ है, जिसका अर्थ है कि बाहरी दिखावे पर विश्वास नहीं करना चाहिए।